ईदगाह by प्रेमचंद POST-2
ईदगाह
प्रेमचंद
Idgaah - Full Story | Class 11 Hindi Chapter 1 | Antra
रमज़ान के पूरे तीस रोज़ों के बाद ईद आई है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभात है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक़ है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कितना शीतल है।
गाँव में हलचल मची हुई है। सभी लोग ईदगाह जाने की तैयारी कर रहे हैं। बच्चों में सबसे अधिक खुशी है। उन्हीं बच्चों में एक छोटा-सा लड़का हामिद भी है।
हामिद बहुत गरीब है। उसके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। वह अपनी बूढ़ी दादी अमीना के साथ रहता है। उसके पास केवल तीन पैसे हैं, लेकिन उसके मन में बहुत उत्साह है।
अमीना चिंतित है क्योंकि घर में खाने तक का सामान नहीं है। फिर भी वह हामिद को मेले में जाने देती है।
गाँव के बच्चे मेले की ओर निकलते हैं। रास्ते में शहर की बड़ी-बड़ी इमारतें, अदालत, कॉलेज और मिठाई की दुकानें देखकर वे तरह-तरह की बातें करते हैं।
ईदगाह पहुँचकर सभी नमाज़ पढ़ते हैं। नमाज़ के बाद मेले का आनंद शुरू होता है। बच्चे झूले झूलते हैं, खिलौने खरीदते हैं और मिठाइयाँ खाते हैं।
महमूद सिपाही, मोहसिन भिश्ती, नूरे वकील और सम्मी धोबन खरीदते हैं। हामिद के पास केवल तीन पैसे हैं।
हामिद खिलौने और मिठाइयाँ छोड़कर लोहे की दुकान पर रखे चिमटे को देखता है। उसे याद आता है कि उसकी दादी रोटियाँ बनाते समय हाथ जला लेती हैं।
वह सोचता है कि अगर वह चिमटा खरीद लेगा, तो दादी का हाथ नहीं जलेगा। दुकानदार से मोलभाव करके वह तीन पैसे में चिमटा खरीद लेता है।
दोस्त उसका मज़ाक उड़ाते हैं, लेकिन हामिद अपने चिमटे को सबसे बहादुर और काम का साबित करता है। वह कहता है कि उसका चिमटा बंदूक भी बन सकता है और शेर से लड़ भी सकता है।
घर लौटकर जब हामिद अपनी दादी को चिमटा देता है, तो अमीना पहले नाराज़ होती है। लेकिन जब उसे पता चलता है कि हामिद ने उसकी तकलीफ़ को सोचकर चिमटा खरीदा है, तो उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं।
वह हामिद को गले लगा लेती है और उसे ढेरों दुआएँ देती है।
समाप्त
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